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Showing posts from April, 2017

जानिये कैसे बिज़नेस स्टार्टअप्स कुछ ही वर्षो में आपको बना सकते हैं करोड़पति

जानिये कैसे बिज़नेस स्टार्टअप्स कुछ ही वर्षो में आपको बना सकते हैं करोड़पतिटाटा, बिरला और अम्बानी जैसे कारोबारी परिवार भारत में अथाह संपत्ति के प्रतिक है। इन परिवारों को इतनी संपत्ति हासिल करने के लिए कई दशक लगे है। हाल के वर्षो में हमने देखा है कि युवा उद्यमी महज कुछ ही वर्षो में स्टार्टअप के जरिये कई करोड़ रुपये की संपत्ति बना लेते है। ज्यादातर मामलों में उद्यमी अपनी कंपनियों के मुनाफा करने से पहले ही करोड़ो के मालिक बन जाते है। कैसे बनते हैं स्टार्टअप चलाने वाले युवा उद्यमी इतने कम समय में करोड़ो रुपये के मालिक? क्या है इनका सीक्रेट फार्मूला? जानिये आगे की स्लाइड/पैरा में।एक स्टार्टअप के शुरुआत से आर्थिक ताकत हासिल करने के सफर में कुछ पड़ाव है। हम एक-एक कर इन पड़ावों के बारे में जानकारी दे रहें हैं।
सबकुछ एक आईडिया से स्टार्ट होता है। जितना उम्दा आईडिया होगा उतना ही आसान उसे आगे ले जाने का सफर रहेगा। हालांकि जिस आईडिया से उद्यमी शुरुआत करते है उसमें समय के साथ बड़े परिवर्तन की जरुरत होती है लेकिन शुरुआती आईडिया सबसे ज्यादा महत्व रखता है।जब किसी व्यक्ति के पास कोई बिज़नस आईडिया होता है और बि…

15 हज़ार रूपये से शुरू कर 1100 करोड़ तक का सफ़र तय करने वाले एक किसान-पुत्र

15 हज़ार रूपये से शुरू कर 1100 करोड़ तक का सफ़र तय करने वाले एक किसान-पुत्रसफ़लता की यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने एफएमसीजी के सारे नियम ही बदल डाले। इस शख्स ने सैशे-क्रांति लाकर पूरे बिज़नेस के क्षेत्र में तहलका ही मचा दिया। इन्होनें अपने बिज़नेस की शुरुआत 15000 रूपये की एक मामूली रकम से की और आज इनका सालाना टर्न-ओवर 1100 करोड़ के पार है। लेकिन सफ़लता का यह सफ़र इतना आसान नहीं था, कठिन संघर्ष, कड़ी मेहनत और कुछ नया करने की चाह में आज ये बिज़नेस जगत के एक जाने-माने टाइकून बन बैठे।जी हाँ हम बात कर रहें हैं, केविन केयर के सीईओ सी के रंगनाथन की। रंगनाथन के सफर की शुरुआत तमिलनाडु के एक छोटे से शहर कड्डलोर से हुई। एक बेहद की गरीब किसान परिवार में पैदा लिए रंगनाथन ने अपनी प्राथमिक शिक्षा पिता से ही प्राप्त की। रंगनाथन पढ़ाई में कमजोर थे इसलिए उनके पिता चाहते थे कि वह या तो खेती करे या फिर बिज़नेस करे। रंगनाथन का एक और शौक था, वह यह कि उन्हें पालतू जानवर और पक्षी पालने का बेहद शौक था। जब वह पांचवी में थे तब उनके पास 500 कबूतर, बहुत तरह की मछलियां और विभिन्न प्रजाति के पक्षी हुआ करते थे। अपने इस श…

छोटे कारोबारियों को डिजिटल प्लैटफॉर्म मुहैया करा इस लड़की ने यूँ खड़ी की करोड़ों का कारोबार

छोटे कारोबारियों को डिजिटल प्लैटफॉर्म मुहैया करा इस लड़की ने यूँ खड़ी की करोड़ों का कारोबारसाल 2011 तक ई-कॉमर्स की दुनिया में नए-नए बिज़नेस आइडिया के साथ कारोबारी कूदते जा रहे थे। उस दौर में फैशन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट का सिर्फ एक फीसदी ही ऑनलाइन था। इस कमी को करीब से महसूस की एक लड़की और उसनें एक ऐसा फैशन-लाइफस्टाइल पोर्टल बनाया, जहाँ लोग इंडिया में बने बेहतरीन प्रोडक्ट्स का कलेक्शन देख सकें। देश के करीब 2 करोड़ छोटे कारोबारियों को एक डिजिटल प्लैटफॉर्म मुहैया कराने की यह सोच बेहद क्रांतिकारी साबित हुई और आज यह पोर्टल भारत में खासकर महिलाओं के लिए सबसे बड़ा और फेवरेट ऑनलाइन फैशन-लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म बन चुका है।आज की कहानी है फैशन पोर्टल लाइमरोड डॉट कॉम की आधारशिला रखने वाली उद्यमी सुचि मुखर्जी की। साल 2012 में इसकी शुरुआत होकर आज यह भारत की एक मशहूर फैशन पोर्टल का रूप ले चुकी है। दिल्ली के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में जन्मीं सूचि की माँ चाहती थीं कि वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई करे लेकिन सूचि को इकोनॉमिक्स में काफी इंटरेस्ट था। अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बाद सूचि ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स स…

चलने की क्षमता खो देने के बावजूद दो-दो बार शून्य से 1000 करोड़ की कंपनी बनाने वाले शख्स

चलने की क्षमता खो देने के बावजूद दो-दो बार शून्य से 1000 करोड़ की कंपनी बनाने वाले शख्सधैर्य और दृढ़ संकल्प का बेमिसाल उदाहरण पेश करती दिल को छू लेने वाली यह कहानी एक शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति की है, जिसनें शून्य से एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। एक छोटे से फोटोकॉपी की दूकान से शुरुआत कर भारत के खुदरा व्यापार में क्रांति लाने वाले इस शख्स को जिंदगी की राह में अनगिनत बाधाओं का सामना करना पड़ा। व्यापार में कई करोड़ों की हानि के बावजूद इन्होनें हार न मानते हुए एक बार फिर से नए साम्राज्य का निर्माण कर कारोबारी जगत में सब को आश्चर्यचकित कर दिया।गरीबी से त्रस्त परिवार में पैदा लिए राम चन्द्र अग्रवाल बचपन में ही पोलियो का शिकार हो गए और अपने चलने की क्षमता को खो दिया। बैसाखी के सहारे चलते हुए उन्होंने जीवन का हर-एक दिन बड़ी मुश्किल से गुजारा। किसी तरह ग्रेजुएशन की पढाई पूरी करने के बाद वर्ष 1986 में इन्होनें पैसे कर्ज लेकर एक फोटोकॉपी की दूकान खोली।एक साल तक दूकान चलाने के बाद राम चन्द्र ने कोई खुदरा करोबार शुरू करने की सोची। इसी कड़ी में इन्होनें कोलकाता के लाल बाज़ार में एक कपड़ा बेचने …

पिता के अरबों डॉलर साम्राज्य को छोड़कर खुद की काबिलियत से बना ली 10,000 करोड़ की कंपनी

पिता के अरबों डॉलर साम्राज्य को छोड़कर खुद की काबिलियत से बना ली 10,000 करोड़ की कंपनीअबतक हमनें शून्य से शिखर तक का सफ़र तय करने वाले कई युवा उद्यमियों के सफलता की कहानियां पढ़ी। लेकिन आज की कहानी एक ऐसे उद्यमी के बारे में है जिन्होंने अपने पिता के खरबों डॉलर के कारोबार का उत्तराधिकारी बनने के बजाय खुद की काबिलियत से अपनी करोड़ों रूपये की कंपनी बना डाली। इस शख्स ने न सिर्फ करोड़ों रूपये की कंपनी बनाई बल्कि भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों को एक शानदार तोहफा भी दिया। इंटरनेट के जरिये संदेशों के आदान-प्रदान की सुविधा देने वाले दुनिया की सबसे लोकप्रिय ऐप व्हाट्सअप को भारतीय बाज़ार में टक्कर देने के उद्येश्य से इन्होंने एक ऐप का निर्माण किया जिसकी मार्केट वैल्यूएशन आज 10 हज़ार करोड़ रूपये है।यह कहानी है ‘हाईक’ ऐप बनाने वाले 29 साल के कविन भारती मित्तल की। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कविन, देश के दिग्गज कारोबारी और भारती एयरटेल समूह के सस्थापक सुनीत भारती मित्तल के बेटे हैं। अन्य करोड़पति के बेटे की तरह कविन ने लक्ज़री जिंदगी का मज़ा लेने की जगह अपनी पढ़ाई पर फोकस रखा। स्कूली शिक्षा …