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Showing posts from May, 2017

हार्डवेयर की दुकान पर मजदूरी कर मेहनत से बनाया 7000 करोड़ का विशाल कारोबार

हार्डवेयर की दुकान पर मजदूरी कर मेहनत से बनाया 7000 करोड़ का विशाल कारोबारसफलता की यह कहानी है एक ऐसे इंसान की जिसनें बचपन से ही गरीबी और अभावों को बेहद करीब से महसूस किया। महज 16 वर्ष की उम्र में अपने पिता को खो देने के बाद तो परिवार का सारा भार इसी नाजुक कंधों पर आ टिका। ऐसी निःसहाय परिस्थिति में इस शख्स ने संघर्ष को गले लगाते हुए आजीविका की खातिर मुंबई की सड़कों पर दर-दर की ठोकरें खानी शुरू कर दी। जेब में एक फूटी कौड़ी तक नहीं लेकिन आँखों में सपना लिए इस शख्स ने हमेशा चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया और आज दुनिया के जाने-माने उद्योगपति की सूची में शुमार कर रहें हैं।यह कहानी जाने-माने उद्योगपति और अरबों डॉलर की डेन्यूब समूह के संस्थापक-अध्यक्ष रिजवान साजन की सफलता के इर्द-गिर्द घूम रही है। मुंबई के एक बेहद ही गरीब परिवार में पैदा लिए रिजवान की जिंदगी में उस वक्त भूचाल आया, जब 16 वर्ष की आयु में सर से पिता का साया उठ गया। परिवार पहले से ही बुरी आर्थिक हालातों से जूझ रहा था और पिता की मृत्यु के बाद तो एक वक़्त खाने के लिए संघर्ष शुरू हो गई। खुद को जिंदा रखने के लिए और परिवार में बड़ा होने के…

15 हज़ार रूपये से शुरू कर 1100 करोड़ तक का सफ़र तय करने वाले एक किसान-पुत्र

15 हज़ार रूपये से शुरू कर 1100 करोड़ तक का सफ़र तय करने वाले एक किसान-पुत्रसफ़लता की यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने एफएमसीजी के सारे नियम ही बदल डाले। इस शख्स ने सैशे-क्रांति लाकर पूरे बिज़नेस के क्षेत्र में तहलका ही मचा दिया। इन्होनें अपने बिज़नेस की शुरुआत 15000 रूपये की एक मामूली रकम से की और आज इनका सालाना टर्न-ओवर 1100 करोड़ के पार है। लेकिन सफ़लता का यह सफ़र इतना आसान नहीं था, कठिन संघर्ष, कड़ी मेहनत और कुछ नया करने की चाह में आज ये बिज़नेस जगत के एक जाने-माने टाइकून बन बैठे।जी हाँ हम बात कर रहें हैं, केविन केयर के सीईओ सी के रंगनाथन की। रंगनाथन के सफर की शुरुआत तमिलनाडु के एक छोटे से शहर कड्डलोर से हुई। एक बेहद की गरीब किसान परिवार में पैदा लिए रंगनाथन ने अपनी प्राथमिक शिक्षा पिता से ही प्राप्त की। रंगनाथन पढ़ाई में कमजोर थे इसलिए उनके पिता चाहते थे कि वह या तो खेती करे या फिर बिज़नेस करे। रंगनाथन का एक और शौक था, वह यह कि उन्हें पालतू जानवर और पक्षी पालने का बेहद शौक था। जब वह पांचवी में थे तब उनके पास 500 कबूतर, बहुत तरह की मछलियां और विभिन्न प्रजाति के पक्षी हुआ करते थे। अपने इस श…

250 रूपये से शुरुआत कर 500 करोड़ की कंपनी खड़ा करने वाले बिहार के एक किसान-पुत्र

आज की कहानी एक ऐसे शख्स की है, जिनकी जीवन यात्रा किसी फिल्म से कम नहीं है। इस शख्स ने इंजिनियर बनने के सपने लिए घर से निकल तो गये लेकिन बुरी आर्थिक हालातों के सामने हार माननी पड़ी। पेट भरने के लिए कई छोटे-मोटे काम करते हुए इन्होनें जब एक कंप्यूटर सस्थान में दाखिला लेने की कोशिश की तो इन्हें अंग्रेजी में कमजोर बोल कर वहां भी नाकामी ही मिली। लेकिन अपनी नाकामी को ही अपना हथियार बना इन्होनें भरपूर मेहनत किया और वो कर दिखाया जो उनके मां-बाप ने कभी सोचा भी नहीं था। शून्य से शिखर तक पहुँचने वाले इस किसान-पुत्र की कहानी बेहद प्रेरणादायक है।आज की कहानी है एक दिग्गज आईटी कारोबारी अमित कुमार दास की सफलता को लेकर। बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज कस्बे में एक बेहद ही पिछड़े गांव में एक किसान के घर पैदा लिए अमित के परिवार में भी लड़के आम किसान परिवारों की तरह बड़े होकर खेती-गिरस्ती में हाथ बंटाया करते थे। किसी तरह सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पटना के एएन कॉलेज से साइंस से इंटर किया। बचपन से ही बड़े सपने लिए अमित खेती से दूर पढ़ाई कर इंजिनियर बनना चाहतें थे। घर की बुरी आर्थिक हालात …

शून्य से की थी शुरुआत, फिर अंबानी, बिरला जैसों को पटखनी देकर बनें देश के दिग्गज कारोबारी

शून्य से की थी शुरुआत, फिर अंबानी, बिरला जैसों को पटखनी देकर बनें देश के दिग्गज कारोबारीयदि देश में सफल कारोबारी की चर्चा होती है तो लोगों की जुबान पर टाटा, अंबानी और बिरला जैसे कुछ चंद नाम सबसे पहले आते। इन कारोबारी दिग्गजों को हर जुबान पर जगह बनाने में कई दशक लगे। लेकिन वक़्त के साथ और भी कई लोग इन दिग्गज उद्योगपतियों की सूचि में अपनी जगह बनाए। इनमें कई ऐसे शख्स हैं जिन्होंने कठिन मेहनत और परिश्रम की बदौलत शून्य से शुरुआत कर इस मुकाम तक पहुंचे कि आज अंबानी और बिरला से कंधों-से-कंधा मिलाकर चलते हैं। और ताज्जुब की बात यह है कि हम ऐसे कई लोगों को जानते तक नहीं।आज हम ऐसे ही एक सफल कारोबारी की कहानी लेकर आए हैं जिन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत पिता के बियरिंग बिजनेस से की थी। धंधा बंद होने के बाद भी इन्होंने हार नहीं मानी और काम करते रहे। आज देश के रिटेल कारोबार में इनकी तूती बोलती है। इतना ही नहीं इन्होंने रिटेल बिजनेस में रिलायंस और बिरला जैसी बड़ी कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया।हम बात कर रहें हैं एवेन्यू सुपरमार्ट लिमिटेड के मालिक राधाकृष्ण दमानी की सफलता के बारे में। आज दमानी देश के शीर्ष…

12वीं फ़ेल मेकेनिक ने बनाई पानी से चलने वाली कार, मेक इन इंडिया के लिए ठुकराया विदेशी ऑफर

12वीं फ़ेल मेकेनिक ने बनाई पानी से चलने वाली कार, मेक इन इंडिया के लिए ठुकराया विदेशी ऑफरइंसान अगर जिंदगी में कुछ हासिल करने में असफल हो जाता है तो प्रायः अपने तक़दीर को ही कोसता है। लेकिन जो इंसान अपनी कमी को पहचानते हुए उसे दुरुस्त करने में सफल हो जाता उनके लिए दुनिया की कोई भी मंजिल अनछुई नहीं रह सकती। किसी ने सच ही कहा है “हम वो हैं जो हार कर भी कहते हैं कि वो मंजिल ही बदनसीब थी, जो हमें न पा सकी वरना जीत की क्या औकात जो हमें ठुकरा दे।” आज हम एक ऐसी ही शख्सियत से आपको रूबरू करा रहें हैं जिन्होंने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के इतना बड़ा कारनामा कर दिखाया है कि आप सुनकर चौंक जायेंगें।मिलिए मध्य प्रदेश के सागर जिले में रहने वाले मैकेनिक रईस मकरानी से, इन्होंने एक ऐसी कार बनाई है, जो पानी से चलती है। कार ठीक करते करते मकरानी इतने एक्सपर्ट हो गये कि उनके अंदर कार बनाने की क्षमता विकसित हो गई और एक दिन उन्होंने वो कर दिखाया जिस काम को बड़ी डिग्री और करोड़ों की सैलरी लेने वाले इंजीनियर्स भी नहीं कर पाए।दरअसल मकरानी का परिवार गाड़ियों की रिपयेरिंग और मेंटेनैंस का कारोबार करता आया है। पिछले 50…