12वीं फ़ेल मेकेनिक ने बनाई पानी से चलने वाली कार, मेक इन इंडिया के लिए ठुकराया विदेशी ऑफर - ATG News

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Tuesday, May 2, 2017

12वीं फ़ेल मेकेनिक ने बनाई पानी से चलने वाली कार, मेक इन इंडिया के लिए ठुकराया विदेशी ऑफर

12वीं फ़ेल मेकेनिक ने बनाई पानी से चलने वाली कार, मेक इन इंडिया के लिए ठुकराया विदेशी ऑफर

इंसान अगर जिंदगी में कुछ हासिल करने में असफल हो जाता है तो प्रायः अपने तक़दीर को ही कोसता है। लेकिन जो इंसान अपनी कमी को पहचानते हुए उसे दुरुस्त करने में सफल हो जाता उनके लिए दुनिया की कोई भी मंजिल अनछुई नहीं रह सकती। किसी ने सच ही कहा है “हम वो हैं जो हार कर भी कहते हैं कि वो मंजिल ही बदनसीब थी, जो हमें न पा सकी वरना जीत की क्या औकात जो हमें ठुकरा दे।” आज हम एक ऐसी ही शख्सियत से आपको रूबरू करा रहें हैं जिन्होंने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के इतना बड़ा कारनामा कर दिखाया है कि आप सुनकर चौंक जायेंगें।

मिलिए मध्य प्रदेश के सागर जिले में रहने वाले मैकेनिक रईस मकरानी से, इन्होंने एक ऐसी कार बनाई है, जो पानी से चलती है। कार ठीक करते करते मकरानी इतने एक्सपर्ट हो गये कि उनके अंदर कार बनाने की क्षमता विकसित हो गई और एक दिन उन्होंने वो कर दिखाया जिस काम को बड़ी डिग्री और करोड़ों की सैलरी लेने वाले इंजीनियर्स भी नहीं कर पाए।

दरअसल मकरानी का परिवार गाड़ियों की रिपयेरिंग और मेंटेनैंस का कारोबार करता आया है। पिछले 50 सालों से हिन्द मोटर नाम से उनका गैराज चल रहा है। लगभग 35 साल पहले पढ़ाई के दौरान 12वीं में फेल करने के बाद मकरानी अपने पिता के कहने पर अपने इस पुश्तैनी गैराज का काम देखने शुरू कर दिए थे।

मकरानी बताते हैं कि एक दिन गैस वेल्डिंग करने के दौरान उन्हें पानी से कार चलाने का आइडिया सूझा। गाड़ी के इंजन के पिस्टन को चलाने के लिए आग और करंट चाहिए। वेल्डिंग में भी कैल्शियम कार्बाइड और लिक्विड के मिलने से आग पैदा होती है। उसने अपनी पेट्रोल कार के इंजन में हल्का फेरबदल किया और गाड़ी के फ्यूल टैंक में पेट्रोल के बजाय पानी और कैल्शियम कार्बाइड की पाइप लगा दी। इसके बाद गाड़ी को स्टार्ट करके देखा तो इंजन ऑन हो गया। इस तकनीक को विकसित करने में करीब पांच साल लग गए। अब उसकी कार 20 लीटर पानी और 2 किलो कैल्शियम कार्बाइड के मिश्रण से तैयार ईंधन से 20 किलोमीटर चलती है।

मकरानी साल 2013 में इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफ इंडिया के मुंबई स्थित ऑफिस से अपने फॉर्मूले को पेटेंट भी कराया है। मीडिया ख़बरों में आने के बाद दुनिया की कई बड़ी-बड़ी कंपनियों ने इनके साथ काम करने का प्रस्ताव रखा। इसी कड़ी में चीन के सियाग शहर से इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी कोलियो के एमडी सुमलसन ने इस फॉर्मूले पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा। वहीं 2013 में ही दुबई की एक इन्वेस्टमेंट कंपनी लस्टर ग्रुप ने भी उन्हें इस फॉर्मूले पर काम करने के लिए सहयोग करने का ऑफर दिया था। लेकिन भारत में रहकर फॉर्मूला तैयार और लॉन्च करने की बात को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी।

मकरानी चाहते तो विदेशी कंपनियों के हाथों अपने आविष्कार का सौदा कर सकते थे लेकिन इनकी एकमात्र इच्छा है कि अपने देश में रहकर इस फोर्मुले पर काम करें। इससे न सिर्फ भारत में रोजगार के अवसर पैदा होंगें बल्कि मेक इन इंडिया जैसी महत्वकांक्षी योजना को भी बल मिलेगा।

एक और दिलचस्प बात यह है कि इस कार को चलाने के लिए पीने के पानी की नहीं बल्कि इस्तेमाल की हुई वेस्टेज पानी की आवश्यकता है। इतना ही नहीं नहाने, कपड़े धोने और यहां तक कि गंदे नाली के पानी से भी यह कार चल सकती है। इस कार में चार लोग आसानी से बैठ सकते हैं तथा इसे चलाने में प्रति दस किमी में लगभग 20 रुपए का खर्च आता है, जो वर्तमान पेट्रोल, डीजल, सीएनजी एलपीजी और एथनॉल से चलनी वाली कारों से बेहद सस्ती है।

यह सच है कि किसी भी बड़े काम को करने के लिए बड़ी डिग्री की आवश्यकता नहीं होती और मकरानी इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। किसी भी काम को करने के लिए कागज़ के चंद टुकड़ों की नहीं, बल्कि ज़रूरत होती है मजबुत इरादे और दृढ इच्छाशक्ति की।

No comments:

Post a Comment

Note: Only a member of this blog may post a comment.

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here